अस्ताचल में बिखर गयी है
जीवन की अभिलाषा
बाल भानु का पुनः जन्म हो
बने, लघु जीवन की परिभाषा
पुनः संजो लूँ उन पत्रों को
बिखर गए जो ज्ञान शून्य में
ग्रन्थित कर लूँ विस्मृतियों को
भूलूँ याद करूँ
जीवन की वह प्रथम किरण
मृत्यु सर्ग में, पुनः काव्य की आशा
अस्ताचल में बिखर गयी है
जीवन की अभिलाषा …
© Rajesh Srivastava
Arthniya panktiyan sir ..