Monthly Archives: July 2017

नयी झील, बहुत बड़ी झील

घर से, नगर से दूर दिखी गाँव के पास, नयी झील कहा कुछ ने, सुना कुछ ने झील बड़ी है, बहुत बड़ी झील अंजुली जल से भर माँ से बेटी ने पूछा, इससे बड़ी झील? कितनी बड़ी झील? अचरज हुआ, तुम … Continue reading →

Posted in My Writings | Leave a comment

सच असाधारण झूठ है

सच असाधारण झूठ है जन्म की भावना, शिशु की है या माँ की या पिता की मैं पिता हूँ, यह अभी सच नहीं पिता पुरुष से कितना अलग है सब राह के राहगीर हैं कुछ चल पड़े बिना राह के … Continue reading →

Posted in My Writings | Leave a comment

अपूर्ण

अस्ताचल में बिखर गयी है जीवन की अभिलाषा बाल भानु का पुनः जन्म हो बने, लघु जीवन की परिभाषा पुनः संजो लूँ उन पत्रों को बिखर गए जो ज्ञान शून्य में ग्रन्थित कर लूँ विस्मृतियों को भूलूँ याद करूँ जीवन … Continue reading →

Posted in My Writings | 1 Comment