घर से, नगर से दूर
दिखी गाँव के पास, नयी झील
कहा कुछ ने, सुना कुछ ने
झील बड़ी है, बहुत बड़ी झील
अंजुली जल से भर
माँ से बेटी ने पूछा,
इससे बड़ी झील? कितनी बड़ी झील?
अचरज हुआ,
तुम नहीं जानते
अथाह जल से भरी ..
पर झील है कहाँ?
क्या रेत की झील, है पथिक का भ्रम?
मीलों में बसी
बिन जल की, छोटी है झील
पथराई आँखों में, धुँधली सी झील
नगर के घरों से
चलो गाँव को
अंजुली में जल लिए
भरने को झील
सब मिलकर भरें, थोड़े ही जल से
चिड़िया सूरज बादल
दिखे बिम्ब सबका
नगर को गाँव से जोड़ती
बीती सदी को नयी सोच से
माँ से मुझे जोड़ती
सच है, बड़ी है झील
बहुत बड़ी झील
© Rajesh Srivastava